घरेलू गैस सिलेंडर 29 रुपये महंगा: कांग्रेस का मोदी सरकार पर हमला, महंगाई को लेकर फिर गरमाई सियासत
Published Date: 7 जून 2026
Meta Description: घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। जानिए गैस सिलेंडर महंगा होने की वजह, सरकार का पक्ष, विपक्ष की प्रतिक्रिया और आम जनता पर इसका असर।
Focus Keyword: घरेलू गैस सिलेंडर 29 रुपये महंगा
घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी से बढ़ी आम जनता की चिंता
एक बार फिर रसोई का बजट बिगड़ने वाला है। 7 जून 2026 से घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। इस फैसले के बाद देशभर में करोड़ों परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका जताई जा रही है। तेल विपणन कंपनियों द्वारा लागू की गई नई दरों के अनुसार दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब पहले से ही खाद्य पदार्थों, बिजली, परिवहन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आम लोगों की जेब पर दबाव बना रही हैं।
कांग्रेस ने साधा केंद्र सरकार पर निशाना
घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ते ही विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोल दिया। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा:
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बढ़ोतरी से बढ़ी आम जनता की चिंता
"महंगाई मैन मोदी का चाबुक फिर चला है। अब घरेलू गैस सिलेंडर 29 रुपए महंगा कर दिया गया। मोदी का फंडा साफ है- जनता से वसूली करो, अमीर दोस्त की तिजोरी भरो।"
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार लगातार आम जनता पर आर्थिक बोझ डाल रही है जबकि बड़े उद्योगपतियों और कॉरपोरेट घरानों को राहत दी जा रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि महंगाई के मुद्दे पर सरकार जवाब देने से बच रही है और आम परिवारों की परेशानियों को नजरअंदाज कर रही है।
आखिर क्यों बढ़े गैस सिलेंडर के दाम?
विशेषज्ञों के अनुसार घरेलू एलपीजी की कीमतों में यह बढ़ोतरी कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारणों से जुड़ी हुई है।
1. पश्चिम एशिया में जारी तनाव
पिछले कुछ महीनों से पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ है और कच्चे तेल तथा एलपीजी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
2. तेल कंपनियों पर बढ़ता दबाव
सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की लागत बढ़ने के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी दबाव को कम करने के लिए कीमतों में संशोधन किया गया है।
3. मार्च 2026 के बाद दूसरी बढ़ोतरी
मार्च 2026 में भी घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में लगभग 60 रुपये की वृद्धि की गई थी। जून में हुई नई बढ़ोतरी के बाद तीन महीनों में कुल बढ़ोतरी लगभग 89 रुपये तक पहुंच गई है।
सरकार का क्या कहना है?
केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की वास्तविक लागत काफी अधिक है, लेकिन सरकार उपभोक्ताओं को पूरी कीमत का बोझ नहीं दे रही है।
रिपोर्टों के अनुसार एक घरेfलू सिलेंडर की वास्तविक आपूर्ति लागत 1600 रुपये से अधिक बताई जा रही है, जबकि उपभोक्ताओं से इससे काफी कम कीमत वसूली जा रही है। सरकार का दावा है कि भारत में अभी भी कई देशों की तुलना में घरेलू गैस अपेक्षाकृत सस्ती है।
आम जनता पर क्या होगा असर?
घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की वृद्धि भले ही पहली नजर में छोटी लगे, लेकिन इसका प्रभाव करोड़ों परिवारों के मासिक बजट पर पड़ेगा।
गृहिणियों की बढ़ी चिंता
देश के अधिकांश घरों में खाना बनाने के लिए एलपीजी सिलेंडर का उपयोग किया जाता है। लगातार बढ़ती कीमतों के कारण परिवारों को अपने मासिक खर्चों में कटौती करनी पड़ सकती है।
मध्यम वर्ग पर अतिरिक्त बोझ
मध्यम वर्ग पहले से ही शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और परिवहन खर्चों से जूझ रहा है। ऐसे में गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ना उनकी आर्थिक चुनौतियों को और बढ़ा सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों पर प्रभाव
ग्रामीण इलाकों में उज्ज्वला योजना के तहत लाखों परिवार एलपीजी से जुड़े हैं। हालांकि कई परिवार पहले से ही सिलेंडर रिफिल कराने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। नई कीमतें उनकी समस्याओं को और बढ़ा सकती हैं।
महंगाई का राजनीतिक मुद्दा बनने की संभावना
भारत में रसोई गैस की कीमतें हमेशा से एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा रही हैं। जब भी एलपीजी के दाम बढ़ते हैं, विपक्ष इसे सरकार के खिलाफ प्रमुख हथियार के रूप में इस्तेमाल करता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में महंगाई और गैस सिलेंडर की कीमतें राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकती हैं। विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की कोशिश करेगा जबकि सरकार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का हवाला देकर अपना पक्ष रखेगी।
पिछले वर्षों में गैस सिलेंडर की कीमतों का सफर
एक समय ऐसा था जब घरेलू गैस सिलेंडर 400-500 रुपये के बीच उपलब्ध होता था। लेकिन अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार, कर संरचना, सब्सिडी व्यवस्था और अन्य कारणों के चलते पिछले दशक में कीमतों में उल्लेखनीय बदलाव आया है।
हालांकि समय-समय पर सरकार ने उज्ज्वला योजना और लक्षित सब्सिडी के माध्यम से राहत देने का प्रयास भी किया है।
विशेषज्ञों की राय
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले महीनों में और दबाव देखने को मिल सकता है।
हालांकि यदि वैश्विक आपूर्ति सामान्य होती है और भू-राजनीतिक तनाव कम होता है तो कीमतों में स्थिरता आने की संभावना भी है।
क्या उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत?
फिलहाल सरकार की ओर से किसी नई सब्सिडी या राहत पैकेज की घोषणा नहीं की गई है। लेकिन विपक्ष और उपभोक्ता संगठनों की बढ़ती मांग को देखते हुए आने वाले समय में सरकार कुछ राहतकारी कदम उठा सकती है।
विशेष रूप से गरीब और उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए अतिरिक्त सहायता पर विचार किया जा सकता है।
निष्कर्ष
घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी ने एक बार फिर महंगाई को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। जहां सरकार इसे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और ऊर्जा लागत से जोड़कर देख रही है, वहीं कांग्रेस सहित विपक्षी दल इसे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बता रहे हैं।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा केवल आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। फिलहाल करोड़ों भारतीय परिवारों को अपने घरेलू बजट में एक और बढ़ोतरी का सामना करना पड़ेगा और महंगाई की चर्चा फिर से तेज होने की संभावना है।
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यह लेख वास्तविक समाचार रिपोर्टों पर आधारित है कि 7 जून 2026 से घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में ₹29 की बढ़ोतरी हुई और विपक्ष ने इस पर केंद्र सरकार की आलोचना की। (Reuters)
