क्या CM योगी के आदेश का पालन नहीं कर रहा बिजली विभाग?
24 घंटे शहरी और 18 घंटे ग्रामीण बिजली सप्लाई के दावों के बीच रातभर ब्लैकआउट से जनता परेशान
दिनांक: 25 मई 2026
लेखक: विशेष संवाददाता
भीषण गर्मी, उमस भरी रातें और लगातार हो रही बिजली कटौती ने उत्तर प्रदेश के लाखों लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। एक तरफ मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शहरों में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हालात इन दावों से बिल्कुल अलग दिखाई दे रहे हैं। गांवों से लेकर छोटे कस्बों और कई बड़े शहरों तक लोग रातभर बिजली कटौती से जूझ रहे हैं। सवाल उठने लगे हैं कि क्या बिजली विभाग मुख्यमंत्री के आदेशों का पालन करने में विफल हो रहा है?
उत्तर प्रदेश में मई की भीषण गर्मी के बीच बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है। राज्य सरकार लगातार दावा कर रही है कि पर्याप्त बिजली उपलब्ध है और जनता को निर्धारित रोस्टर के अनुसार आपूर्ति दी जा रही है। लेकिन सोशल मीडिया, स्थानीय शिकायतों और समाचार रिपोर्टों में सामने आ रही तस्वीर कुछ और कहानी बयान कर रही है। लोग कह रहे हैं कि “कागजों में बिजली है, लेकिन जमीन पर अंधेरा।”
हाल के दिनों में कई जिलों से यह शिकायत सामने आई कि रात में अचानक कई-कई घंटे बिजली गायब हो जाती है। ग्रामीण इलाकों में हालात और भी खराब बताए जा रहे हैं, जहां लोग पूरी रात पंखे और कूलर के बिना गुजारने को मजबूर हैं। (Aaj Ki Khabar)
CM योगी का स्पष्ट आदेश
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से हाल ही में बिजली व्यवस्था की समीक्षा बैठक की गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि:
शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए
तहसील मुख्यालयों में लगभग 21 से 22 घंटे बिजली मिले
ग्रामीण क्षेत्रों में कम से कम 18 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जाए
फाल्ट होने पर त्वरित मरम्मत हो
अनावश्यक कटौती बंद की जाए
समाचार रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी भी दी कि जनता को परेशान करने वाली लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। (Aaj Ki Khabar)
लेकिन इन आदेशों के बावजूद राज्य के कई हिस्सों में जनता की शिकायतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
“रात में सबसे ज्यादा कटौती” — जनता का आरोप
राज्य के कई जिलों से लोगों ने आरोप लगाया कि दिन की तुलना में रात में बिजली कटौती ज्यादा हो रही है। लोगों का कहना है कि दिन में कुछ समय बिजली रहती है, लेकिन जैसे ही रात गहराती है, कटौती शुरू हो जाती है।
गांवों में स्थिति अधिक गंभीर बताई जा रही है। कई ग्रामीणों का कहना है कि:
रात 10 बजे के बाद बार-बार बिजली जाती है
2 से 4 घंटे लगातार सप्लाई बंद रहती है
लो वोल्टेज की समस्या अलग बनी हुई है
ट्रांसफार्मर ओवरलोड होने से फ्यूज उड़ रहे हैं
भीषण गर्मी में बच्चे, बुजुर्ग और मरीज सबसे अधिक परेशान हो रहे हैं। कई लोग छतों और सड़कों पर रात बिताने को मजबूर हैं।
क्या सिर्फ “कागजी बिजली” चल रही है?
कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि बिजली विभाग वास्तविक कटौती को कम दिखा रहा है। गाजियाबाद समेत कई जिलों में यह आरोप लगा कि आधिकारिक रिकॉर्ड में कम कटौती दिखाई गई, जबकि जमीनी स्तर पर घंटों बिजली बंद रही। (Jagran)
जनता का आरोप है कि:
शिकायत दर्ज कराने के बाद भी समाधान नहीं होता
बिजली विभाग फोन नहीं उठाता
फाल्ट सुधारने में कई घंटे लग जाते हैं
स्थानीय स्तर पर जवाबदेही नहीं है
यही वजह है कि लोगों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
बिजली संकट की असली वजह क्या है?
विशेषज्ञों और रिपोर्टों के अनुसार बिजली संकट के पीछे कई कारण हो सकते हैं।
1. रिकॉर्ड बिजली मांग
मई की गर्मी में एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। राज्य में बिजली की मांग ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गई है। (Navbharat Times)
2. ट्रांसफार्मरों पर ओवरलोड
कई जगहों पर पुराने ट्रांसफार्मर बढ़े हुए लोड को संभाल नहीं पा रहे हैं। इससे बार-बार फाल्ट हो रहे हैं।
3. पावर प्लांट बंद होना
कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि कई पावर प्लांट रखरखाव या तकनीकी कारणों से बंद हैं, जिससे आपूर्ति प्रभावित हो रही है। (Navbharat Times)
4. मैनपावर की कमी
उपभोक्ता परिषद ने भी आरोप लगाया कि बिजली विभाग में कर्मचारियों की कमी के कारण फाल्ट सुधारने में देरी हो रही है। (Jagran)
5. स्थानीय स्तर पर कुप्रबंधन
कई क्षेत्रों में लाइन लॉस, अवैध कनेक्शन और खराब वितरण व्यवस्था भी बड़ी समस्या मानी जा रही है।
गांव बनाम शहर: बिजली वितरण में असमानता?
ग्रामीण इलाकों के लोगों का कहना है कि शहरों की तुलना में गांवों में ज्यादा कटौती की जा रही है। कई ग्रामीण उपभोक्ताओं का आरोप है कि:
“शहर में बिजली बचाने के लिए गांवों की सप्लाई काट दी जाती है।”
हालांकि विभाग इस आरोप से इनकार करता है, लेकिन जमीनी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
कई किसानों ने कहा कि रात में सिंचाई के समय बिजली गायब रहती है, जिससे खेती प्रभावित हो रही है। ट्यूबवेल नहीं चल पाने से खेत सूखने लगे हैं।
जनता पूछ रही — आदेश जमीन पर कब उतरेंगे?
सोशल मीडिया पर लोग लगातार सवाल उठा रहे हैं:
अगर सरकार ने 24 घंटे बिजली का आदेश दिया है, तो कटौती क्यों?
शिकायत के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?
क्या अधिकारी मुख्यमंत्री के निर्देशों को गंभीरता से नहीं ले रहे?
जनता को राहत कब मिलेगी?
कई उपभोक्ताओं ने यह भी कहा कि बिजली बिल समय पर वसूला जाता है, लेकिन सेवा वैसी नहीं मिलती।
विपक्ष को मिला बड़ा मुद्दा
बिजली संकट अब राजनीतिक मुद्दा भी बनता जा रहा है। विपक्षी दल सरकार पर हमला बोल रहे हैं। उनका कहना है कि:
सरकार सिर्फ दावे कर रही है
जमीनी स्तर पर बिजली व्यवस्था चरमरा गई है
जनता गर्मी में परेशान है
अधिकारी जवाबदेह नहीं हैं
हालांकि सरकार का कहना है कि लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है और व्यवस्था सुधारने के प्रयास जारी हैं।
बिजली विभाग का पक्ष
बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि:
अत्यधिक गर्मी के कारण मांग अचानक बढ़ी है
कई जगह तकनीकी फाल्ट आ रहे हैं
ट्रांसफार्मर क्षमता से अधिक लोड झेल रहे हैं
फाल्ट सुधारने के लिए टीमें लगातार काम कर रही हैं
अधिकारियों का यह भी दावा है कि अधिकांश क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर के अनुसार सप्लाई दी जा रही है।
“जनता को सिर्फ आश्वासन नहीं, राहत चाहिए”
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आदेश जारी कर देना काफी नहीं है। जमीनी निगरानी और जवाबदेही तय करना भी जरूरी है।
अगर सरकार वास्तव में 24 घंटे बिजली देना चाहती है, तो:
वितरण व्यवस्था मजबूत करनी होगी
पुराने ट्रांसफार्मर बदलने होंगे
फाल्ट रिस्पॉन्स सिस्टम तेज करना होगा
लाइन लॉस कम करना होगा
स्थानीय अधिकारियों की जवाबदेही तय करनी होगी
क्या आने वाले दिनों में सुधरेगी स्थिति?
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में कुछ इलाकों में आंधी और बारिश की संभावना है, जिससे तापमान में थोड़ी राहत मिल सकती है। (Navbharat Times)
लेकिन सवाल सिर्फ मौसम का नहीं है। जनता अब स्थायी समाधान चाहती है।
अगर बिजली संकट जल्द नहीं सुलझा, तो यह आने वाले समय में सरकार के लिए बड़ा जनसरोकार का मुद्दा बन सकता है।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश में बिजली संकट ने सरकार और बिजली विभाग दोनों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट आदेशों के बावजूद अगर जनता रातभर अंधेरे में रहने को मजबूर है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की बड़ी चुनौती मानी जाएगी।
शहरों में 24 घंटे और गांवों में 18 घंटे बिजली सप्लाई का दावा तभी सफल माना जाएगा, जब आम नागरिक वास्तव में राहत महसूस करें। फिलहाल जमीन पर जनता का अनुभव कुछ और ही कहानी कह रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है:
