आजमगढ़ में मजदूर दिवस पर श्रमिक सम्मान समारोह: 300 से अधिक श्रमिकों को मिला सम्मान, अधिकारों की लड़ाई तेज करने का संकल्प

 

आजमगढ़ में मजदूर दिवस पर श्रमिक सम्मान समारोह: 300 से अधिक श्रमिकों को मिला सम्मान, अधिकारों की लड़ाई तेज करने का संकल्प

प्रकाशन तिथि: 1 मई 2026 | स्थान: आजमगढ़, उत्तर प्रदेश

मजदूर दिवस के अवसर पर आजमगढ़ जनपद में एक भव्य और सामाजिक चेतना से भरपूर कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें श्रमिकों के सम्मान, उनके अधिकारों की चर्चा और उनके भविष्य को सशक्त बनाने के संकल्प पर विशेष जोर दिया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी उत्तर प्रदेश इकाई द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रमिकों को सम्मानित किया गया और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष को और मजबूत बनाने का आह्वान किया गया।


कार्यक्रम का आयोजन और उद्देश्य

कार्यक्रम का पहला चरण सिधारी पुल के समीप स्थित श्रमिक विश्रामगृह में आयोजित किया गया। यह स्थान लंबे समय से उपेक्षित और अवैध कब्जों की चपेट में था, जिसे हाल ही में मुक्त कराया गया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश महासचिव एवं जिला प्रभारी राजेश विश्वकर्मा राज ने की, जबकि संचालन जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष बालचंद जैसवारा द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिवमोहन शिल्पकार (प्रदेश संयोजक एवं प्रदेश अध्यक्ष) ने अपने संबोधन में श्रमिकों के योगदान को राष्ट्र निर्माण की रीढ़ बताया।

श्रमिकों का सम्मान




श्रमिकों की भूमिका और चुनौतियों पर जोर

अपने संबोधन में शिवमोहन शिल्पकार ने कहा:

“समाज की हर बड़ी उपलब्धि के पीछे श्रमिकों का योगदान होता है। आज के इस बदलते युग में अगर कोई वर्ग सबसे ज्यादा संघर्ष कर रहा है, तो वह मजदूर वर्ग है।”

उन्होंने पूंजीवादी व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा कि यह व्यवस्था श्रमिकों को उनके अधिकारों से वंचित कर रही है, जो सामाजिक, आर्थिक और मानसिक उत्पीड़न के समान है। उन्होंने यह भी कहा कि श्रमिकों को मजबूर बनाना एक सुनियोजित व्यवस्था का हिस्सा बन चुका है, जिसे बदलने की आवश्यकता है।


श्रमिक विश्रामगृह को लेकर महत्वपूर्ण पहल

कार्यक्रम के दौरान यह घोषणा की गई कि सिधारी स्थित श्रमिक विश्रामगृह को पूरी तरह से अवैध कब्जों से मुक्त करा लिया गया है। अब इस स्थान को श्रमिकों के लिए सुरक्षित और उपयोगी बनाने के लिए नियमित साफ-सफाई और निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।

इस पहल का उद्देश्य यह है कि मजदूर यहां बैठकर अपनी समस्याओं, अधिकारों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा कर सकें।


श्रमिकों का सम्मान और जागरूकता अभियान

कार्यक्रम के दूसरे चरण में कलेक्ट्रेट कचहरी स्थित पार्टी कार्यालय के नीचे 300 से अधिक श्रमिकों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही उन्हें भगवान विश्वकर्मा और डॉ भीमराव अंबेडकर के चित्र प्रदान किए गए, जो उनके सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाते हैं।

इसके अतिरिक्त, तकिया मोहल्ला स्थित चकला क्षेत्र में स्वर्गीय कामरेड कतवारू राम गोड के आवास पर भी श्रमिकों को सम्मानित किया गया।


आने वाले समय के लिए संकल्प

कार्यक्रम में यह संकल्प लिया गया कि अगले मजदूर दिवस से पहले श्रमिकों के जीवन में ठोस बदलाव लाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे। पार्टी नेताओं ने कहा कि वे मजदूरों के हक और अधिकारों की लड़ाई को और मजबूती से लड़ेंगे और उन्हें न्याय दिलाने का हर संभव प्रयास करेंगे।


नोएडा में मजदूरों की स्थिति पर चिंता

कार्यक्रम के दौरान नोएडा में कथित रूप से 400 मजदूरों को अवैध रूप से बंद किए जाने की घटना पर भी चिंता व्यक्त की गई। नेताओं ने सरकार से मांग की कि इन मजदूरों को तत्काल रिहा किया जाए और उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।


ऐतिहासिक संदर्भ और श्रम नीतियों की चर्चा

अपने संबोधन में शिवमोहन शिल्पकार ने वर्ष 1989 में रामविलास पासवान के श्रम मंत्री बनने का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उस समय मजदूरों के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं बनाई गई थीं, लेकिन आज तक वे पूरी तरह लागू नहीं हो पाई हैं।

उन्होंने सरकार से मांग की कि इन योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाए ताकि मजदूर वर्ग को वास्तविक लाभ मिल सके।


राजनीतिक नेतृत्व और समर्थन

कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट किया गया कि श्रमिकों के अधिकारों की लड़ाई पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में लड़ी जाएगी। इसमें विशेष रूप से पशुपति कुमार पारस (राष्ट्रीय अध्यक्ष) और प्रिंस राज पासवान (राष्ट्रीय कार्यकारिणी अध्यक्ष) का नाम प्रमुखता से लिया गया।


समाज और सरकार के लिए संदेश

कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि यदि मजदूरों को न्याय नहीं मिला, तो यह देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण होगा। श्रमिक वर्ग अपने पेट की भूख को दबाकर भी समाज के विकास में योगदान देता है, इसलिए उनके साथ न्याय होना अत्यंत आवश्यक है।

नेताओं ने कहा:

“जो सरकार अपने मजदूरों की पीड़ा नहीं समझती, वह समाज और देश के लिए हितकारी नहीं हो सकती।”


कार्यक्रम में शामिल प्रमुख लोग

इस अवसर पर कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से:

  • प्रदेश सचिव रामसागर चौहान

  • डॉ राम रतन गौतम

  • ताज आदमी

  • कैलाश गोड

  • मुरली

  • मीडिया प्रभारी अमित गौतम

  • लव कुश राजभर

  • पवन शर्मा

  • पिंटू

  • नामी चिरैयाकोट वादी

इन सभी के साथ हजारों की संख्या में आमजन और श्रमिक वर्ग के लोग उपस्थित रहे।


समापन और भविष्य की दिशा

कार्यक्रम के अंत में श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील की गई। आयोजकों ने यह भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में मजदूरों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर उठाया जाएगा और उनके समाधान के लिए हर स्तर पर संघर्ष किया जाएगा।


निष्कर्ष

आजमगढ़ में आयोजित यह श्रमिक सम्मान समारोह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। इसमें न केवल श्रमिकों को सम्मानित किया गया, बल्कि उनके अधिकारों और समस्याओं को लेकर गंभीर चर्चा भी की गई।

मजदूर दिवस के इस अवसर पर लिया गया संकल्प आने वाले समय में श्रमिक वर्ग के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। यदि इन प्रयासों को निरंतरता मिलती है, तो यह पहल पूरे प्रदेश और देश के लिए एक उदाहरण बन सकती है।