हरियाणा IPS ‘आत्महत्या’ केस में बड़ा मोड़: एक और पुलिसकर्मी ने खुद को गोली मारी, मरे हुए ADGP पर लगाया भ्रष्टाचार का आरोप

हरियाणा IPS ‘आत्महत्या’ केस में बड़ा मोड़: एक और पुलिसकर्मी ने खुद को गोली मारी, मरे हुए ADGP पर लगाया भ्रष्टाचार का आरोप

तारीख: 14 अक्टूबर 2025 | स्थान: चंडीगढ़ / रोहतक | रिपोर्ट: सचिता सवीर न्यूज़ डेस्क

परिचय: एक ऐसा मामला जिसने व्यवस्था हिला दी

हरियाणा पुलिस एक बार फिर विवादों और सवालों के घेरे में है। पिछले हफ्ते ADGP वाई. पुरन कुमार की संदिग्ध आत्महत्या के बाद अब एक और पुलिसकर्मी ASI संदीप लाथर ने खुद को गोली मार ली है। मरने से पहले उसने एक वीडियो संदेश रिकॉर्ड किया, जिसमें मरे हुए ADGP पर भ्रष्टाचार, जातिवाद और सत्ता के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए।

यह घटनाक्रम न केवल पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक पारदर्शिता की स्थिति पर भी गहरी चिंता पैदा करता है।

भाग 1 – ADGP वाई. पुरन कुमार की मौत

7 अक्टूबर 2025 को हरियाणा के वरिष्ठ IPS अधिकारी ADGP वाई. पुरन कुमार अपने चंडीगढ़ स्थित सरकारी निवास में मृत पाए गए। उन्होंने कथित तौर पर अपनी सर्विस रिवॉल्वर से गोली मारकर आत्महत्या की। पुलिस को उनके पास से 9 पन्नों का हस्तलिखित सुसाइड नोट मिला।

सुसाइड नोट के मुख्य बिंदु:

  • वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लगातार अपमान और गलत तबादले
  • पोस्टिंग और प्रमोशन में भ्रष्टाचार और पक्षपात
  • 8 अधिकारियों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज थे।
  • जातिगत भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न को आत्महत्या का कारण बताया।

उनकी मौत के बाद कांग्रेस और कई दलित संगठनों ने राज्यभर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। विपक्ष ने उच्च न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग की।

भाग 2 – ASI संदीप लाथर की आत्महत्या और चौंकाने वाले आरोप

14 अक्टूबर 2025 को रोहतक जिले में साइबर यूनिट के ASI संदीप लाथर की लाश उसके कमरे में मिली। वह ADGP आत्महत्या केस की जांच में शामिल था। मृतक के पास से एक 3 पन्नों का सुसाइड नोट और एक वीडियो रिकॉर्डिंग बरामद हुई।

वीडियो में किए गए आरोप:

  • ADGP वाई. पुरन कुमार पर रिश्वत लेकर पोस्टिंग देने का आरोप।
  • भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने और संरक्षित करने का आरोप।
  • जाति और राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग करने की बात।
  • ईमानदार अफसरों को डराने-धमकाने का जिक्र।
“जिसे राज्य पीड़ित बता रहा है, असल में वही सबसे भ्रष्ट था। सच्चाई बोलने की कोई जगह नहीं है,” लाथर ने लिखा।

इस खुलासे ने पूरा मामला उलट दिया — जो केस पहले जातिगत भेदभाव का प्रतीक माना जा रहा था, अब वह भ्रष्टाचार, सत्ता संघर्ष और संस्थागत पतन की परतें खोल रहा है।

भाग 3 – जांच पर बढ़ता दबाव

दोनों आत्महत्याओं की फॉरेंसिक जांच और हाई-लेवल इनक्वायरी जारी है। हरियाणा सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। DGP शत्रुजीत कपूर को छुट्टी पर भेजा गया है, जबकि ओ. पी. सिंह ने कार्यभार संभाला है।

जांच टीम दोनों सुसाइड नोट और वीडियो की प्रमाणिकता की जांच कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट 25 अक्टूबर 2025 तक आने की संभावना है।

भाग 4 – राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

विपक्ष की मांग:

कांग्रेस, AAP और INLD ने इस घटना को “हरियाणा पुलिस की सड़ांध” करार देते हुए न्यायिक जांच की मांग की। विपक्ष का कहना है कि “एक हफ्ते में दो मौतें इस बात का सबूत हैं कि सिस्टम में गहरी समस्या है।”

दलित संगठनों का आक्रोश:

दलित अधिकार संगठनों ने राज्य सरकार पर जातिगत भेदभाव का आरोप लगाते हुए गुरुग्राम, हिसार और जींद में प्रदर्शन किया। नारे लगे — “कुमार को न्याय दो, लाथर की सच्चाई बोलो।”

सरकार की प्रतिक्रिया:

गृह विभाग ने बयान जारी किया — “दोनों मामले दुखद हैं। निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होगी। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

भाग 5 – भ्रष्टाचार के आरोप और सच्चाई की परतें

जांच में सामने आया है कि पुलिस में पोस्टिंग और प्रमोशन में पैसे और राजनीतिक प्रभाव की भूमिका थी। कुछ अधिकारी यह भी बताते हैं कि विभाग में जातिगत गुटबाज़ी और लॉबी सिस्टम लंबे समय से चला आ रहा है।

जहां कुमार ने खुद पर हुए भेदभाव का हवाला दिया, वहीं लाथर ने उन्हें जाति को हथियार बनाकर फायदा उठाने वाला बताया। ये विरोधाभासी बयान जांच को और जटिल बना रहे हैं।

भाग 6 – विशेषज्ञों की राय

“जब वरिष्ठ अफसर खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं, तो यह पूरे सिस्टम की विफलता है,” – अधिवक्ता संजय वोहरा।
“पुलिस आत्महत्याएं मानसिक तनाव, राजनीतिक दबाव और नैतिक थकान का परिणाम हैं,” – मनोवैज्ञानिक डॉ. रितु मेहरा।

विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस बल में मानसिक स्वास्थ्य सहायता और आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र की तत्काल जरूरत है।

भाग 7 – आगे क्या?

SIT टीम ने 40 से अधिक पुलिसकर्मियों और अधिकारियों से पूछताछ की है। कॉल रिकॉर्ड, वीडियो, और वित्तीय लेनदेन की जांच जारी है। प्रारंभिक रिपोर्ट में भ्रष्टाचार और राजनीतिक दबाव के संकेत मिलने की संभावना जताई जा रही है।

निष्कर्ष: व्यवस्था के लिए चेतावनी

एक हफ्ते में दो पुलिसकर्मियों की आत्महत्या ने हरियाणा पुलिस की साख पर गहरा दाग लगा दिया है। यह सिर्फ दो अफसरों की मौत की कहानी नहीं, बल्कि उस प्रणालीगत सड़ांध की झलक है जो ईमानदारी और मानसिक स्वास्थ्य को कुचल रही है।

अब वक्त है कि इस मामले को संवेदनशीलता, पारदर्शिता और न्याय के साथ सुलझाया जाए — ताकि आने वाले समय में कोई भी पुलिसकर्मी “सिस्टम से हारकर” अपनी जान न दे।