🇮🇳 मोदी और स्टार्मर ने खोला भारत–ब्रिटेन सहयोग का नया अध्याय: रक्षा, तकनीक, शिक्षा और हरित ऊर्जा में नए समझौते
तारीख: 9 अक्टूबर 2025
लेखक: विशेष संवाददाता, नई दिल्ली / लंदन
श्रेणी: अंतरराष्ट्रीय समाचार | India–UK Relations News | Article | Breaking News
🌍 प्रस्तावना: भारत और ब्रिटेन के रिश्तों में नई दिशा
नई दिल्ली और लंदन के बीच संबंधों ने 9 अक्टूबर 2025 को एक नया ऐतिहासिक मोड़ लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) की मुलाकात ने भारत–ब्रिटेन साझेदारी को एक “नए युग के सहयोग” में बदल दिया।
दोनों नेताओं ने रक्षा, व्यापार, तकनीकी नवाचार, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन, और सांस्कृतिक सहयोग जैसे 6 प्रमुख क्षेत्रों में समझौते पर हस्ताक्षर किए।
यह मुलाकात भारत के लिए उतनी ही अहम थी जितनी कि ब्रिटेन के लिए — क्योंकि दोनों देशों के बीच यह साझेदारी न केवल आर्थिक दृष्टि से बल्कि वैश्विक स्थिरता और रणनीतिक साझेदारी के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
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🇮🇳🤝🇬🇧 पहली बार “2030 विज़न प्लस” पर सहमति
प्रधानमंत्री मोदी और कीर स्टार्मर ने 2021 में शुरू किए गए “India–UK 2030 Roadmap” को आगे बढ़ाते हुए एक नया संस्करण — ‘2030 Vision Plus’ लॉन्च किया।
इस विज़न दस्तावेज़ का उद्देश्य है कि भारत और ब्रिटेन आने वाले दशक में अपने द्विपक्षीय संबंधों को प्रौद्योगिकी, व्यापार, रक्षा, और हरित ऊर्जा के स्तंभों पर खड़ा करें।
स्टार्मर ने कहा,
“भारत आज वैश्विक अर्थव्यवस्था की सबसे तेज़ी से बढ़ती शक्ति है। हमारे सहयोग से न केवल दोनों देशों के लोग लाभान्वित होंगे, बल्कि यह साझेदारी जलवायु, तकनीक और शांति के लिए भी मिसाल बनेगी।”
वहीं मोदी ने अपने वक्तव्य में कहा,
“भारत और ब्रिटेन के बीच यह नया अध्याय ‘नए विश्वास’ और ‘नए दृष्टिकोण’ पर आधारित है। हम साथ मिलकर भविष्य की चुनौतियों का सामना करेंगे।”
🛡️ रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में मजबूत सहयोग
भारत और ब्रिटेन ने रक्षा उत्पादन, साइबर सुरक्षा और समुद्री सहयोग के क्षेत्रों में तीन नए समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
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रक्षा अनुसंधान केंद्र की स्थापना:
भारत के पुणे में ‘India–UK Defence Technology and Research Hub’ बनाया जाएगा, जहां दोनों देशों के वैज्ञानिक मिलकर ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत मिसाइल तकनीक पर काम करेंगे। -
इंडो-पैसिफिक सुरक्षा गठबंधन:
भारत और ब्रिटेन ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा नौसैनिक अभ्यास (Joint Naval Exercises) को नियमित करने का निर्णय लिया है। -
साइबर सुरक्षा टास्क फोर्स:
दोनों देशों ने डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा के लिए एक संयुक्त Cyber Defence Task Force की स्थापना की है।
इन समझौतों से न केवल रक्षा संबंध गहरे होंगे, बल्कि भारत की ‘मेक इन इंडिया’ योजना को भी नया बल मिलेगा।
💼 व्यापार और निवेश में नए अवसर
भारत और ब्रिटेन के बीच Free Trade Agreement (FTA) पर चर्चाओं में उल्लेखनीय प्रगति हुई।
दोनों नेताओं ने घोषणा की कि 2026 तक दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 200 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
मुख्य घोषणाएं:
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ब्रिटेन की कंपनियां भारत में ग्रीन एनर्जी, फार्मा और फिनटेक सेक्टर में 12 बिलियन डॉलर का निवेश करेंगी।
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भारतीय आईटी कंपनियों को ब्रिटेन में वीज़ा और टैक्स में राहत दी जाएगी।
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लंदन और मुंबई के बीच डिजिटल पेमेन्ट ब्रिज बनाने पर सहमति हुई है, जिससे दोनों देशों के फिनटेक लेन-देन आसान होंगे।
मोदी ने कहा,
“हम भारत–ब्रिटेन व्यापार को अगले स्तर पर ले जा रहे हैं। यह साझेदारी ‘लोकल टू ग्लोबल’ सोच का प्रतीक है।”
🎓 शिक्षा और कौशल विकास: छात्रों के लिए नया युग
भारत और ब्रिटेन ने शिक्षा क्षेत्र में दोतरफा सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कई घोषणाएं कीं।
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UK–India Student Mobility Agreement 2.0 के तहत भारतीय छात्रों को ब्रिटेन में पढ़ाई के बाद 3 साल तक कार्य अनुमति (Post Study Work Visa) मिलेगी।
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ब्रिटेन ने भारत में 10 नए विश्वविद्यालय साझेदारी केंद्र (University Partnership Hubs) खोलने की घोषणा की।
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भारतीय शिक्षकों के लिए Teacher Training Exchange Programme शुरू किया जाएगा।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टार्मर ने कहा,
“हम भारतीय छात्रों के लिए अपने दरवाज़े और दिल दोनों खुले रखेंगे। शिक्षा, दोनों देशों को जोड़ने वाली सबसे मज़बूत डोर है।”
🌱 हरित ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन पर साझा प्रतिबद्धता
भारत और ब्रिटेन ने Green Growth Alliance 2025 लॉन्च किया है, जो दोनों देशों के लिए नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, और जलवायु नवाचार के क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देगा।
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भारत में ब्रिटिश निवेश से सौर ऊर्जा पार्क और हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र लगाए जाएंगे।
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ब्रिटेन भारत की ‘Mission LiFE’ (Lifestyle for Environment) योजना में भागीदार बनेगा।
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दोनों देशों ने कार्बन-न्यूट्रल शिपिंग कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है।
यह कदम जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक संघर्ष में भारत और ब्रिटेन को एक प्रमुख भागीदार बनाता है।
🏥 स्वास्थ्य और बायोटेक सहयोग
भारत और ब्रिटेन ने महामारी के बाद के दौर में साझा स्वास्थ्य अनुसंधान और दवा निर्माण को प्राथमिकता दी है।
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ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और भारत के आईसीएमआर के बीच नई साझेदारी के तहत “Vaccine Innovation Lab” की स्थापना होगी।
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दोनों देशों ने Mental Health Awareness Initiative शुरू करने की घोषणा की।
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भारत में ब्रिटिश सहायता से AI आधारित हेल्थ डेटा प्रोजेक्ट्स पर काम किया जाएगा।
मोदी ने कहा,
“स्वास्थ्य सेवा में भारत और ब्रिटेन का सहयोग केवल विज्ञान का नहीं, बल्कि मानवता का मिशन है।”
🎭 संस्कृति, पर्यटन और लोगों के बीच जुड़ाव
भारत और ब्रिटेन के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मज़बूत करने के लिए कई पहलें की गईं:
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लंदन में अगले वर्ष आयोजित होगा “India–UK Cultural Year 2026”, जिसमें भारतीय संगीत, कला और सिनेमा को प्रदर्शित किया जाएगा।
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दोनों देशों ने Tourism Visa on Arrival Programme की घोषणा की।
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ब्रिटेन में भारतीय प्रवासियों के लिए Cultural Heritage Fund की स्थापना की जाएगी।
इन प्रयासों से दोनों देशों के लोगों के बीच भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव और मजबूत होगा।
💬 वैश्विक मंच पर साझा दृष्टिकोण
भारत और ब्रिटेन ने संयुक्त रूप से यह घोषणा की कि वे संयुक्त राष्ट्र, जी-20 और कॉमनवेल्थ प्लेटफॉर्म पर एक-दूसरे के हितों का समर्थन करेंगे।
स्टार्मर ने मोदी की वैश्विक नेतृत्व क्षमता की सराहना की और कहा कि “भारत का उदय विश्व के लिए सकारात्मक संकेत है।”
वहीं मोदी ने ब्रिटेन को “विश्वसनीय साझेदार” बताते हुए कहा,
“भारत–ब्रिटेन संबंध अब केवल राजनयिक नहीं, बल्कि मानवीय रिश्ते बन चुके हैं।”
📊 विशेषज्ञों की राय
अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञों के अनुसार, यह बैठक पिछले दशक की सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता मानी जा रही है।
भारतीय थिंक टैंक Observer Research Foundation (ORF) ने कहा कि “स्टार्मर सरकार के आने के बाद ब्रिटेन की नीति भारत की ओर पहले से अधिक सकारात्मक हुई है।”
ब्रिटिश मीडिया ने इसे “Reset of Relations” कहा है, जबकि भारतीय अख़बारों ने इसे “साझेदारी का स्वर्ण युग” बताया है।
💬 विपक्ष और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
भारत में विपक्षी नेताओं ने इस बैठक का स्वागत करते हुए कहा कि “अगर समझौतों का सही क्रियान्वयन हुआ तो भारत को कई क्षेत्रों में लाभ होगा।”
वहीं ब्रिटिश संसद में भी इस सहयोग को “post-Brexit era की सबसे बड़ी सफलता” कहा गया।
🧭 निष्कर्ष: भविष्य की राह
भारत और ब्रिटेन की यह नई साझेदारी सिर्फ समझौतों का समूह नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाली वैश्विक पहल है।
यह दोनों देशों को तकनीक, शिक्षा, रक्षा और पर्यावरण के क्षेत्रों में एक साझा मंच पर लाती है।
प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों में,
“भारत और ब्रिटेन अब सिर्फ साझेदार नहीं, बल्कि प्रगति के सह-यात्री हैं।”
और कीर स्टार्मर ने समापन में कहा,
“हमारा साझा लक्ष्य है — एक सुरक्षित, समृद्ध और हरित विश्व।”
