📰 मासूम की हत्या से मचा हड़कंप – आजमगढ़, सिधारी थाना
📅 तारीख: 25 सितंबर 2025
📍 स्थान: पठान टोला, सिधारी थाना, आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश)
प्रस्तावना
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले का सिधारी थाना क्षेत्र इन दिनों गहरे सदमे और दहशत में है। एक मासूम की बेरहमी से हत्या ने पूरे इलाके की नींद उड़ा दी है। पठान टोला में रहने वाले 7 वर्षीय शहजेब अली की हत्या ने न सिर्फ उसके परिवार को तोड़ दिया, बल्कि समाज और प्रशासन के सामने भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बुधवार को लापता हुए इस मासूम का शव गुरुवार को उसके ही घर के सामने बोरे में बंद मिला। घटना ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया और पुलिस-प्रशासन पर सवालों की बौछार शुरू हो गई।
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1. मासूम का लापता होना – शुरुआत जिसने बनाया सन्नाटा
बुधवार की दोपहर का समय था। मोहल्ले के बच्चे हमेशा की तरह गलियों में खेल रहे थे। इन्हीं बच्चों के बीच शहजेब अली भी अपने छोटे-छोटे सपनों के साथ खेलकूद में मशगूल था। अचानक परिवार को खबर मिली कि शहजेब घर नहीं लौटा।
परिजन पहले यह सोचकर निश्चिंत रहे कि शायद बच्चा दोस्तों या रिश्तेदारों के घर होगा। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, बेचैनी बढ़ने लगी। घंटों की तलाश के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला। घरवालों की उम्मीदें टूटने लगीं और चिंता का माहौल गहराता गया।
2. गुमशुदगी की रिपोर्ट और पुलिस की शुरुआती प्रतिक्रिया
शहजेब के पिता और अन्य परिजनों ने देर शाम पुलिस थाने का रुख किया और गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
गांव वालों का कहना है कि अगर उसी वक्त पूरे इलाके में बड़े स्तर पर तलाशी अभियान शुरू होता, तो शायद बच्चा जिंदा मिल जाता। यह पुलिस की लापरवाही आगे चलकर पूरे मामले में बड़ा मुद्दा बन गई।
3. फिरौती की कॉल – उम्मीद और डर का संगम
गुरुवार सुबह मृतक के परिवार को एक अज्ञात नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने साफ कहा कि बच्चा उनके पास है और उसकी रिहाई के लिए मोटी रकम चाहिए।
इस फोन कॉल से परिवार में एक पल के लिए उम्मीद जगी कि शायद बच्चा जीवित है। लेकिन यह उम्मीद ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी। फोन कॉल के कुछ ही घंटों बाद शहजेब का शव घर के सामने बोरे में बंद बरामद हुआ।
4. शव की बरामदगी – मातम और गुस्से का माहौल
गुरुवार दोपहर पूरे मोहल्ले की रूह कांप गई जब मासूम का शव उसके ही घर के सामने बोरे में बंद मिला। शव देखकर परिजनों की चीख-पुकार से पूरा इलाका गूंज उठा।
मां जैस्मीन खातून फूट-फूटकर रो रही थीं। उनका कहना था –
“मेरा बेटा हमेशा कहता था कि वह पढ़कर बड़ा आदमी बनेगा, लेकिन किसी ने मेरी गोद ही उजाड़ दी।”
इस दर्दनाक दृश्य ने वहां मौजूद हर शख्स की आंखों को नम कर दिया।
5. पुलिस की जांच और फॉरेंसिक साक्ष्य
घटना की सूचना मिलते ही एसपी ग्रामीण चिराग जैन भारी पुलिस बल, फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वॉड के साथ मौके पर पहुंचे।
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पुलिस ने आस-पास की छतों और गलियों की तलाशी ली।
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पास के एक मकान की छत पर खून के धब्बे मिले।
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फॉरेंसिक टीम ने सैंपल इकट्ठे किए।
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शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
पुलिस का कहना है कि आरोपी बहुत जल्द गिरफ्त में होंगे और पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।
6. परिजनों का आक्रोश – पड़ोसियों पर आरोप
शहजेब के परिजनों ने पड़ोसियों पर हत्या का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बच्चा आखिरी बार पड़ोसियों के घर खेलते हुए देखा गया था।
परिवार का आरोप है कि –
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गुमशुदगी की सूचना समय पर देने के बावजूद पुलिस ने कोई सक्रियता नहीं दिखाई।
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अगर सही समय पर तलाशी अभियान होता तो बच्चा जीवित मिल सकता था।
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परिवार ने पड़ोसियों को संदेहास्पद बताया।
7. ग्रामीणों का गुस्सा – बुलडोजर की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
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ग्रामीणों ने आरोपी के घर पर बुलडोजर चलाने की मांग की।
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लोगों ने पुलिस की लापरवाही पर सवाल उठाए।
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कई जगहों पर जाम लगाकर प्रदर्शन भी किया गया।
गुस्साए भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस को भारी बल और पीएसी तैनात करनी पड़ी।
8. तनावपूर्ण माहौल और सुरक्षा इंतजाम
इलाके में भारी तनाव का माहौल है। प्रशासन ने हर गली और चौराहे पर पुलिस बल तैनात किया है।
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किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पुलिस लगातार गश्त कर रही है।
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मोहल्ले में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है।
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बच्चे और अभिभावक दोनों ही दहशत में हैं।
9. कानूनी कार्रवाई और प्रशासनिक बयान
एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने कहा कि –
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हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
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आरोपियों की तलाश के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं।
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बहुत जल्द इस जघन्य अपराध का पर्दाफाश होगा।
प्रशासन ने लोगों को आश्वासन दिया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
10. सामाजिक और मानवीय पहलू
यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक गहरा संदेश है।
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मासूम बच्चों की सुरक्षा अब सबसे बड़ा सवाल है।
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अपराधों में मासूमों का शिकार होना बढ़ता जा रहा है।
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समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।
निष्कर्ष
आजमगढ़ का सिधारी थाना क्षेत्र उस मासूम की चीखों को हमेशा याद रखेगा जिसने कभी कहा था – “मम्मा, मैं पढ़कर कामयाब बनूंगा।” लेकिन उसके सपनों को किसी ने बेरहमी से कुचल दिया।
यह हत्या न केवल परिवार की दुनिया उजाड़ गई, बल्कि कानून-व्यवस्था और समाज दोनों के सामने गंभीर सवाल खड़े कर गई है। अब देखना यह है कि प्रशासन कितनी जल्दी इस मामले को सुलझाता है और पीड़ित परिवार को न्याय दिला पाता है।
