दिल्ली एयरपोर्ट ने यात्रियों को चेताया: यूरोप के एयरपोर्ट्स पर साइबर हमले से हीथ्रो सहित सेवाएं बाधित

 

दिल्ली एयरपोर्ट ने यात्रियों को चेताया: यूरोप के एयरपोर्ट्स पर साइबर हमले से हीथ्रो सहित सेवाएं बाधित (21 सितम्बर 2025)

तारीख: 21 सितम्बर 2025
स्थान: नई दिल्ली | विशेष संवाददाता रिपोर्ट


प्रस्तावना

यूरोप के कई प्रमुख हवाई अड्डों पर शनिवार रात और रविवार सुबह बड़े पैमाने पर साइबर हमला हुआ, जिससे चेक-इन और बोर्डिंग सेवाओं में भारी अव्यवस्था फैल गई। लंदन का हीथ्रो एयरपोर्ट, ब्रुसेल्स और बर्लिन ब्रैंडेनबर्ग जैसे प्रमुख केंद्र प्रभावित हुए। इसके बाद दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (IGI) ने यात्रियों के लिए विशेष सलाह (advisory) जारी की।

दिल्ली एयरपोर्ट ने यात्रियों से अपील की है कि वे यूरोप-गामी और यूरोप से आने वाली उड़ानों की स्थिति पहले ही एयरलाइन से जांच लें, और अगर संभव हो तो वेब-चेक-इन का विकल्प चुनें।




घटना का विवरण

20 सितम्बर 2025 की रात यूरोप के कई एयरपोर्ट अचानक तकनीकी दिक़्क़तों का सामना करने लगे। चेक-इन सिस्टम, बैगेज प्रोसेसिंग और बोर्डिंग पास जनरेशन प्रभावित हो गए। रिपोर्ट्स के अनुसार यह समस्या Collins Aerospace के MUSE चेक-इन प्लेटफॉर्म में आई गड़बड़ी से जुड़ी थी, जिसे साइबर हमले का शिकार बनाया गया।

इस व्यवधान के कारण कई एयरलाइंस को मैनुअल प्रक्रिया अपनानी पड़ी। यात्रियों को लंबे इंतजार और कतारों में खड़ा होना पड़ा। कुछ उड़ानों को रद्द करना पड़ा तो कुछ में भारी देरी हुई।


दिल्ली एयरपोर्ट की आधिकारिक सलाह

दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) ने सोशल मीडिया और प्रेस नोट के जरिए यात्रियों से कहा:

  • यूरोप जाने वाली या वहां से आने वाली उड़ानों के यात्री एयरलाइन की वेबसाइट और ऐप पर फ्लाइट की स्थिति जांचें।

  • वेब-चेक-इन पहले ही पूरा कर लें ताकि एयरपोर्ट पर मैनुअल प्रोसेस से होने वाली दिक़्क़तें कम हों।

  • यात्रियों से समय से पहले एयरपोर्ट पहुंचने की अपील की गई।


यूरोपीय एयरपोर्ट्स की स्थिति

  • हीथ्रो एयरपोर्ट, लंदन:
    सबसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय केंद्रों में शामिल हीथ्रो पर सैकड़ों यात्री प्रभावित हुए। कई उड़ानें देरी से रवाना हुईं।

  • ब्रुसेल्स एयरपोर्ट:
    यहां एयरपोर्ट प्रबंधन ने यात्रियों को धैर्य रखने को कहा और अतिरिक्त स्टाफ लगाया। कुछ उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।

  • बर्लिन ब्रैंडेनबर्ग:
    चेक-इन काउंटरों पर लंबी कतारें लगीं और यात्रियों को कई घंटे तक इंतजार करना पड़ा।


भारतीय यात्रियों पर असर

भारत से यूरोप जाने वाली उड़ानों पर भी इस साइबर हमले का असर पड़ा है।

  • एयर इंडिया ने कहा कि उसकी लंदन और यूरोप-बाउंड उड़ानों में देरी हुई है लेकिन यात्री सेवाओं को प्रभावित न होने देने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।

  • अन्य भारतीय और अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने यात्रियों से फ्लाइट अपडेट्स नियमित रूप से चेक करने को कहा है।


साइबर सुरक्षा की चुनौती

यह घटना बताती है कि आधुनिक विमानन उद्योग किस तरह तृतीय-पक्ष तकनीकी सेवाओं पर निर्भर है। अगर किसी बाहरी सिस्टम पर हमला हो जाए तो उसका असर सीधे एयरपोर्ट और एयरलाइंस के कामकाज पर पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • बैकअप और ऑफलाइन सिस्टम का परीक्षण लगातार होना चाहिए।

  • एयरलाइंस को साइबर सुरक्षा ऑडिट नियमित करना चाहिए।

  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे हमलों के खिलाफ साझा रणनीति बनानी जरूरी है।


यात्रियों के लिए जरूरी सुझाव

  1. फ्लाइट स्टेटस जांचें: एयरलाइन की वेबसाइट और ऐप पर जाएं।

  2. वेब-चेक-इन करें: मोबाइल या प्रिंटेड बोर्डिंग पास अपने पास रखें।

  3. अतिरिक्त समय रखें: एयरपोर्ट पर समय से पहले पहुंचें।

  4. एयरलाइन से जुड़े रहें: एसएमएस, ईमेल और हेल्पलाइन पर नजर रखें।

  5. यात्रा बीमा और विकल्प देखें: अगर फ्लाइट रद्द हो जाए तो एयरलाइन द्वारा दिए विकल्पों का लाभ उठाएं।


सरकार और नियामकों की भूमिका

भारत सरकार और DGCA ने बयान जारी कर कहा कि फिलहाल भारतीय एयरपोर्ट्स पर सीधा असर नहीं पड़ा है। लेकिन सभी हवाई अड्डों को सतर्क रहने और बैकअप सिस्टम सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं।

सूचना-प्रौद्योगिकी मंत्रालय भी स्थिति की निगरानी कर रहा है और यूरोपीय एजेंसियों से लगातार संपर्क में है।


निष्कर्ष

यूरोप के प्रमुख हवाई अड्डों पर हुआ यह साइबर हमला सिर्फ एक तकनीकी व्यवधान नहीं बल्कि वैश्विक विमानन सुरक्षा के लिए चेतावनी है। यह घटना दिखाती है कि आधुनिक विमानन प्रणाली कितनी हद तक डिजिटल बुनियादी ढांचे पर निर्भर है और किसी भी साइबर खतरे का असर लाखों यात्रियों तक तुरंत पहुंच सकता है।

दिल्ली एयरपोर्ट की सलाह स्पष्ट है — यात्री अपनी उड़ान की स्थिति पहले जांचें, वेब-चेक-इन करें और एयरलाइन से जुड़े रहें। यही फिलहाल सबसे कारगर उपाय है जिससे यात्रियों की परेशानी कम की जा सकती है।