17 सितम्बर 2025 : विश्वकर्मा भगवान की उत्पत्ति और पूजा विधान – सम्पूर्ण विशेष रिपोर्ट



📰 17 सितम्बर 2025 : विश्वकर्मा भगवान की उत्पत्ति और पूजा विधान – सम्पूर्ण विशेष रिपोर्ट


प्रस्तावना

भारत में कई पर्व हैं जो हमें हमारी सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक जड़ों से जोड़ते हैं। उनमें से एक महत्वपूर्ण पर्व है विश्वकर्मा पूजा या विश्वकर्मा जयंती। हर वर्ष हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार १७ सितंबर २०२५ को है। इस दिन कारीगर, शिल्पकार, इंजीनियर, ठेकेदार, फैक्ट्री कार्यकर्ता आदि विशेष श्रद्धा एवं भक्ति के साथ कार्यस्थल व उपकरणों की पूजा करते हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि विश्वकर्मा भगवान की उत्पत्ति की कथा क्या है, उनका महत्व क्या है, साथ ही १७ सितंबर को पूजा व विधि कैसी होती है, मुहूर्त क्या है, और अन्य जरूरी बातें


विश्वकर्मा भगवान का स्थान अद्वितीय है। वे न केवल देव शिल्पी (Divine Architect) कहलाते हैं, बल्कि उन्हें संपूर्ण ब्रह्माण्ड का प्रथम अभियंता (First Engineer of the Universe) माना जाता है।

आज हम इस विशेष दिन (17 सितम्बर 2025) पर यह जानेंगे –

  • विश्वकर्मा भगवान की उत्पत्ति कैसे हुई?

  • उनके जीवन और कार्यों का महत्व क्या है?

  • 17 सितम्बर को पूजा विधान कैसे किया जाता है?

  • आधुनिक समय में विश्वकर्मा पूजा क्यों और कैसे महत्वपूर्ण है?


विश्वकर्मा भगवान की उत्पत्ति : पौराणिक और ऐतिहासिक दृष्टि से

वेदों में उल्लेख

  • ऋग्वेद और यजुर्वेद में विश्वकर्मा का वर्णन मिलता है।

  • उन्हें “सर्वज्ञ शिल्पी” और “सृष्टि का निर्माता” कहा गया है।

  • वेदों में उल्लेख है कि उन्होंने सबसे पहले सूर्य, चन्द्र और नक्षत्र मंडल की रचना की।

  • एक मंत्र में कहा गया है:
    “विश्वकर्मा प्रथमं सूर्य चन्द्रमा निर्मितम्।”


पुराणों के अनुसार उत्पत्ति

  • शिवपुराण: ब्रह्मा जी की संतान के रूप में विश्वकर्मा का जन्म हुआ।

  • स्कन्दपुराण: उन्हें प्रजापति का अवतार कहा गया है।

  • भागवत पुराण: विश्वकर्मा ने देवताओं के दिव्य अस्त्र और लोकों की रचना की।

  • महाभारत: पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ का निर्माण विश्वकर्मा ने किय

विभिन्न मान्यताएँ

  1. ब्रह्मा जी की संतान
    ब्रह्मा ने अपनी शक्ति से विश्वकर्मा को उत्पन्न किया और उन्हें सृष्टि निर्माण का दायित्व सौंपा।

  2. सूर्य-पुत्र कथा
    कुछ ग्रंथों में उन्हें सूर्यदेव और संज्ञा की संतान बताया गया है। इससे उनके तेज और दिव्यता का अनुमान लगता है।

  3. पाँच विभाजन की कथा
    माना जाता है कि विश्वकर्मा पाँच रूपों में प्रकट हुए और उनसे पाँच वंश निकले:

    • लोहार

    • बढ़ई

    • स्वर्णकार

    • मूर्तिकार

    • कुंभार


उत्पत्ति का दार्शनिक महत्व

  • विश्वकर्मा जी का जन्म इस बात का प्रतीक है कि श्रम, शिल्प और कौशल ही सभ्यता की नींव हैं।

  • वे मानव समाज को यह सिखाते हैं कि हर निर्माण, हर तकनीक और हर कला, ईश्वर की कृपा और मानवीय परिश्रम का संगम है।

  • इसलिए उन्हें “सृष्टि का प्रथम अभियंता” कहा जाता है।


विश्वकर्मा भगवान की महान कृतियाँ

विश्वकर्मा जी ने अपने दिव्य कौशल से अनेक अद्भुत रचनाएँ कीं:

  • स्वर्गलोक (इंद्रपुरी) का निर्माण

  • लंका नगरी – जिसे बाद में रावण ने प्राप्त किया

  • द्वारका – श्रीकृष्ण के लिए समुद्र में नगरी

  • इंद्रप्रस्थ – पांडवों की राजधानी

  • पुष्पक विमान – कुबेर के लिए निर्मित, बाद में रावण के पास

  • त्रिशूल (शिव का), सुदर्शन चक्र (विष्णु का), वज्र (इंद्र का) जैसे दिव्य अस्त्र


🙏 विश्वकर्मा पूजा का महत्व

  1. कार्यस्थल और औजारों को दिव्य मानकर पूजा करना।

  2. मशीनों की सुरक्षा और दीर्घायु की कामना।

  3. श्रमिकों और कारीगरों को सम्मान देना।

  4. औद्योगिक और तकनीकी प्रगति की प्रतीक।

  5. परिश्रम और शिल्पकला को ईश्वर से जोड़ना।


📅 १७ सितंबर २०२५: तिथि और मुहूर्त

  • तिथि: भाद्रपद कृष्ण चतुर्दशी

  • दिन: बुधवार

  • सूर्योदय: 06:08 AM

  • पूजा मुहूर्त: 07:15 AM से 11:30 AM तक

  • नक्षत्र: पूर्वाभाद्रपद

  • विशेष योग: कन्या संक्रांति


🪔 पूजा सामग्री

  • भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर

  • धूप, दीपक, अगरबत्ती

  • पुष्प, अक्षत, रोली, हल्दी

  • फल, मिठाई, प्रसाद

  • पंचामृत

  • कार्यस्थल के औजार और मशीनें


📖 पूजा विधि

  1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

  2. पूजा स्थल और मशीनों की सफाई करें।

  3. भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित करें।

  4. दीपक, धूप जलाकर आरंभ करें।

  5. फूल, अक्षत, हल्दी, रोली अर्पित करें।

  6. औजारों पर तिलक और पुष्प चढ़ाएँ।

  7. विश्वकर्मा मंत्रों का जाप करें।

  8. प्रसाद बाँटें और आरती करें।


🕉️ विश्वकर्मा पूजा के मंत्र

  • ॐ आधार शक्तिपे नमः

  • ॐ कूमयै नमः

  • ॐ अनन्तम् नमः

  • ॐ पृथिव्यै नमः


⚠️ पूजा में होने वाली गलतियों से बचें

  • गंदे औजार या अस्वच्छ स्थान पर पूजा न करें।

  • अशुद्ध सामग्री का उपयोग न करें।

  • पूजा समय पर न करना दोषपूर्ण माना जाता है।

  • दिखावे की बजाय श्रद्धा से पूजा करें।


🌍 भारत में क्षेत्रीय रूप से पूजा

  • उत्तर भारत: फैक्ट्रियों और वर्कशॉप में विशेष पूजा।

  • बंगाल और ओडिशा: पतंगबाजी और बड़े आयोजन।

  • दक्षिण भारत: इंजीनियर और आर्किटेक्ट विशेष श्रद्धा से पूजा करते हैं।

  • पूर्वोत्तर भारत (असम, त्रिपुरा): गाँव-गाँव सामूहिक पूजा।


📌 आधुनिक समय में महत्व

  • उद्योगों और कंपनियों में मशीनों की सुरक्षा हेतु पूजा।

  • तकनीकी विकास और इंजीनियरिंग क्षेत्र में आस्था।

  • श्रमिकों के सम्मान और सामूहिक सहयोग की भावना।

  • “Make in India” और औद्योगिक उत्पादन से जुड़ी मानसिकता।


Vishwakarma Pooja


❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: विश्वकर्मा पूजा कब मनाई जाती है?
उत्तर: भाद्रपद कृष्ण चतुर्दशी को, इस बार १७ सितंबर २०२५ को।

प्रश्न 2: पूजा का महत्व क्या है?
उत्तर: मशीनों की सुरक्षा, उत्पादन वृद्धि और श्रमिकों का सम्मान।

प्रश्न 3: विश्वकर्मा भगवान कौन थे?
उत्तर: देव शिल्पकार और प्रथम अभियंता, जिन्होंने स्वर्ग, लंका, द्वारका और दिव्य अस्त्र-शस्त्र बनाए।

प्रश्न 4: पूजा विधि क्या है?
उत्तर: स्नान कर, औजार साफ कर, प्रतिमा स्थापित कर, फूल, दीपक और मंत्रों से पूजा की जाती है।


निष्कर्ष

विश्वकर्मा भगवान केवल पौराणिक चरित्र नहीं हैं, बल्कि वे मानव सभ्यता, शिल्प, तकनीक और श्रम के प्रतीक हैं।
उनकी पूजा हमें यह सिखाती है कि ईश्वर ने हमें कौशल दिया है और उसका सही प्रयोग समाज और राष्ट्र की उन्नति में करना ही सबसे बड़ा धर्म है।


  • स्टार्टअप्स और इंडस्ट्रीज़ में इस दिन विशेष आयोजन किए जाते हैं।

  • कई जगहों पर ऑनलाइन वर्चुअल पूजा भी आयोजित की जाती है, ताकि विदेशों में बसे भारतीय भी इसमें शामिल हो सकें।